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नेशनल हाई इस्टिीट्यूट (NHI) पहुंची मिस यूनिवर्स
मिस यूनिवर्स हरनाज कौर ने शुक्रवार को नेशनल हार्ट इस्टिीटयूट पहुंचकर बच्चों का उत्साह बढ़ाया।यहां स्माईल ट्रेन अभियान की ब्राण्ड एम्बेस्डर के तौर पर पहुंची विश्व सुंदरी ने नेशनल हार्ट इंस्ट्टीयूट में चल रही जन स्वास्थ्य सम्बंधी गतिविधियों की जमकर सराहना की। इस अवसर पर देश भर से आए कटे होंठ और तालू आदि के साथ हृदय रोगों का निःशुल्क उपचार ले रहे बच्चों से मिलकर उन्होंने इस प्रयास को उल्लेखनीय बताया। मौके पर एनएचआई के सीईओ एवं वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डाॅ ओ पी यादव व उनकी टीम ने विस्तार से मिस यूनिवर्स को संस्थान की गतिविधियों से अवगत कराया। डॉ यादव ने बताया कि अब तक देश के विभिन्न भागों से 305 से अधिक बच्चों को संस्थान के शल्य चिकित्सक डाॅ करूण अग्रवाल नई मुस्कान दे चुके हैं। इस अवसर पर डाॅ यादव ने संस्थान द्वारा देश के दूरस्थ क्षत्रों में चले रहे जन स्वास्थ्य के कार्यक्रमों के बारे में बताया कि कहा कि हृदय रोगों की रोकथाम के साथ टेलीमेडिसन जैसी सेवाओं के विस्तार के प्रयासों को आगे बढ़ा रहा है। इसमें निराश्रित व कोविड प्रभावित बच्चों को जीवन निधि सहित निःशुल्क हृदय रोगों का निदान आदि शामिल है।
कौर ने ऑल इण्डिया हार्ट फाउण्डेशन द्वारा 70 के दशक से एशिया में किए गए प्रयासों को जाना और डाॅ यादव व उनकी टीम के भारत में हृदय और अन्य रोगों के निदान के लिए किए जा रहे प्रयासों को असाधारण बताया। मिस यूनिवर्स ने मौजूद बच्चों को गले लगाकर स्वागत किया और सदैव उनका उत्साह बढ़ाने का वादा किया। उन्होंने कहा कि हर बच्चें के चेहरे पर मुस्कान जरूरी है और कहा कि नेशनल हार्ट इंस्टिट्यूट इस प्रयास में लगातार नए आयामों को जोड़ रहा है। उन्होंनें कहा कि वह वह कुछ वर्षो पूर्व से इन प्रयासों से जुड़ी है और इसमें अभिभावकों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने सफलता पूर्वक शल्य करा चुके बच्चों के अभिभावकों से कहा कि स्माईल ट्रेन और एनएचआई जैसे सस्थानों द्वारा दी जा रही इस निःशुल्क सेवा का लाभ लें और हर जरूरतमंद बच्चों को इससे जोड़ें । स्माईल ट्रेन अभियान की निदेशक ममता कारोल ने कहा कि भारत में कुपोषण और महिला जनित समस्योें से बच्चों में इस प्रकार के विकार आते हैं। इसके लिए लगातार जागरूकता के प्रयास जारी है। पूरे देश में बड़ी मात्रा में इस प्रकार के विकारों से जूझ रहे बच्चों की इस अभियान से मदद की जा रही है। इस अवसर पर हरनाज कौर ने डाॅ ओ0 पी0 यादव के साथ मिलकर पोषण से जुड़ी पुस्तिका का भी विमोचन किया।
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An article "2021 ACC/AHA clinical practice guideline on coronary artery revascularisation—‘turf protection’ or ‘misinterpretation of science’?" has been published online in the Indian Journal of Thoracic and Cardiovascular Surgery. You can access and view the paper by using the following shared link. (10-minute read) More Info https://url-shortener.me/CBPH
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Corona pandemic, in its wake of ghoulish devastation, also brought certain windfall gains to the MedTech industry, and more specifically to invitro diagnostic (IVD) industry. The latter is expected to grow a whopping more than 50 percent... More Info https://surl.lt/dnhboa
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29 अगस्त की रात 103 बरस की उम्र में डॉ पद्मावती ने अपने उसी अस्पताल 'नेशनल हार्ट इन्स्टीट्यूट' में अंतिम सांस ली जिस अस्पताल को बनाना उनका बड़ा सपना था. जो काम, जो नाम और जो सम्मान डॉ सिवारामाकृष्णा अय्यर पद्मावती को मिला वह बहुत ही गिने-चुने डॉक्टरों को मिला है. सही कहा जाये तो डॉ. बीसी रॉय के बाद यदि किसी भारतीय चिकित्सक ने सचमुच अपार प्रतिष्ठा पाई तो वो डॉ. पद्मावती ही हैं. यह किसी आश्चर्य से कम नहीं था कि 100 बरस की उम्र के बाद भी वह का... More Info https://www.bbc.com/hindi/india-53972799
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Walk into the cardiac wing of any big hospital in India or even the US, and you’re likely to see men in blue scrubs
poring over ECGs, or rushing to OTs to thread catheters through blocked arteries. This medical speciality,
characterised by long working hours and high stress, has traditionally had a lopsided gender ratio. But despite
these odds, one of India’s first cardiology departments was set up by a woman — the legendary Dr S I Padmavati.
Now 103 and retired from active practice, Dr Padmavati was working 12 hours a day, five days a week till late 2015
at the National Heart Institute in Delhi that she founded in 1981. She still comes to the institute once or twice a
week to see some of her older patients.
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